नवरात्रि महोत्सव २०१८

🙏 ज़य माताजी

सभी भक्तों को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाये, माता रानी आपके जीवन मे इसी तरह हर्षोउल्लाश व खुशी की वर्षा करती रहे ऐसी हमारी प्रार्थना है।
समस्त भारतवर्ष में नवरात्रि का त्योहार बड़े धूमधाम ओर श्रद्धा से मनाया जाता है।
नवरात्रि पर्व की शुरुआत अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रथमा से शुरू होकर अश्विन शुक्ल पक्ष नवमी तक होती है।


नो दिन का यह शक्ति पर्व में बहुत से भक्त माता की कठोर तपस्या करते है, जिसमें नो दिन तक निर्जला उपवाश या केवल जल के सहारे नो दिन रहना या केवल एक समय भोजन कर भी किया जाता है।
नवरात्रि की स्थापना माता की प्रतिमा स्थापित कर की जाती है तथा नो दिन तक पूजा की जाती है। प्रत्येक दिन देवी के नो रूपो में से प्रत्येक की पूजा व आराधना की जाती है।


माता के नो रूप इस प्रकार है जिनका क्रमशः प्रथमा से लेकर नवमी तक धूमधाम से आरती व आराधना की जाती है।


  • शैलपुत्री ( पर्वत की बेटी )
  • भ्रमाचारिणी (माँ दुर्गा का शांति पूर्ण रूप)
  • चंद्रघंटा ( माँ का गुस्से का रूप )
  • कुष्मांडा ( माँ का ख़ुशी भरा रूप )
  • स्कंदमाता ( माँ के आशीर्वाद का रूप )
  • कात्यायनी ( माँ दुर्गा की बेटी जैसी )
  • कालरात्रि ( माँ का भयंकर रूप )
  • महागौरी ( माँ पार्वती का रूप और पवित्रता का स्वरुप )
  • सिद्धिदात्री (माँ का ज्ञानी रूप )
नो दिन की पूजा व आराधना के बाद अश्विन शुक्ल पक्ष दशमी को माता की प्रतिमा का विसर्जन बड़े धूमधाम से गाजे बाजे के साथ चिंतामणि सरोवर में किया जाता है।
इस दिन दशहरा का पर्व भी होता है इस दिन श्याम को रावण का दहन किया जाता है।